अनूप नारायण सिंह
बिहार के छपरा जिला के नयागांव थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव में हर साल चैत्र नवमी के मौके पर लगने वाला घोड़ा लुटावन पुत्र पावन मेला इस वर्ष रविवार को लगा। यह मेला कई वर्षो से लगता आ रहा है। जिसमें मल्लाहों के देवता बाबा अमरसिह की पूजा मल्लाह समाज के साथ ही अन्य लोगों द्वारा हर्षोल्लास के साथ की जाती है। बाबा अमर सिंह का यह स्थान नयागांव रेलवे स्टेशन और छपरा पटना मुख्य मार्ग से दक्षिण करीब तीन सौ मीटर की दूरी पर रसूलपुर गांव में गंगा नदी के पावन तट पर स्थित है। इस मेले में दूरदराज के कई जिलों से श्रद्धालु आते हैं । इस मेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कोई श्रद्धालु सच्चे मन से पूजा अर्चना कर स्थान पर चढ़ाये गए मिट्टी के घोड़ा को लूट कर ले जाता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है । पुत्र प्राप्ति एवं मनोकामना पूर्ण होने पर अगले साल मिट्टी के बने दो घोड़ा लाल कपड़ा में लपेटकर चढ़ाने की परंपरा है। श्रद्धालुओं द्वारा हजारों की संख्या में मिट्टी का बना घोड़ा बाबा अमर¨सह को चढ़ाया जाता है। वही मिट्टी का घोड़ा पूजा के बाद पूजा समिति के लोगो द्वारा श्रद्धालु भक्तों के बीच लुटाया जाता है।
घोड़ा लुटावन- पुत्र पावन मेला में इस वर्ष श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। चैत दशमी को लगने वाले इस वृहद मेले में सारण जिले के अलावा सिवान, गोपालगंज, मोतिहारी, चंपारण, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर सहित कई अन्य जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस मेला में घोड़ा लूटने व लुटाने आये थे। इधर तरैया क्षेत्र समेत अन्य प्रखंडों से बड़ी संख्या में महिला पुरुष, युवक, युवतियां इस मेले में शामिल हुए। मान्यता के अनुसार नि:संतान दंपती पुत्र प्राप्ति की कामना से बाबा अमरनाथ के दरबार में आते हैं। मन्नत मानकर मिट्टी का बना घोड़ा लूटते हैं और लाल कपड़े में लपेटकर ले जाते हैं। मन्नत पूरी होने पर मेला में आकर घोड़ा का जोड़ा लगाकर लुटाते हैं। मुजफ्फपुर से आयी महिला मधुलिका, सिवान से आयी पुष्पा देवी सहित कई महिलाओं ने बताया कि मन्नत के अनुसार उन्हें पुत्ररत्‍‌न की प्राप्ति हुई और इस मेला में घोड़ा लुटाने आयी हैं। पिछले कई वर्षो से लगने वाले इस मेले का अब स्वरूप बदल रहा है। इसमें शामिल नवयुवक व नवयुवतियां लाइफ सेटेल करने, नौकरी पाने तथा योग्य वर-वधू प्राप्त करने की मन्नत को ले घोड़ा लुटने आ रहे हैं। नि:संतान दंपतियों से कई गुना अधिक युवक व युवतियां इस मेला में अपनी मन्नत को ले पहुंच रहे हैं।

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