बिहार के अत्यंत पिछड़े कोशी – कमला क्षेत्र का लाडला जिसने लाखो करोड़ो की नौकरी छोरकर विगत एक साल से ज्ञानोदय के माध्यम से प्रतिदिन करीब 500 गरीब और असहाय बच्चो को शिक्षादान कर रहे है| प्रभाष झा कहते है – मै अकेला ही चला था जानिबे मंजिल , मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया| इसी को चरितार्थ करते हुए ज्ञानोदय के साथ साथ स्पार्टन-50 के नाम से एक अनोखे पहल की शुरुवात की जा रही है| स्पार्टन-50 के अंतर्गत क्लास ग्यारवही (कॉमर्स) के ५० बच्चो का चयन करके उन्हें क्लास XI एवं XII (कॉमर्स) एवं प्रोफेशनल कोर्स अर्थात ca/cs/cma/cfa का निःशुल्क कोचिंग के साथ साथ बेहतरीन कैरियर के लिए निः शुल्क लाइफटाइम कोच और काउंसलिंग किया जाएगा| श्री झा ने महज २२ साल की उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसी कठिनतम प्रोफेशनल कोर्स को पूरा करने के बाद आगे मैनेजमेंट की पढाई करते हुए देश विदेश में कई नामचीन कम्पनियों में फाइनेंस के शिखरपद अर्थात ग्रुप चीफ फाइनेंसियल ऑफिसर पर कार्यरत रहे| लेकिन कहते है ना की  जहाँ चाह वहां राह, और महज ३५ वर्ष की उम्र में एक ऐसा फैसले लिया जिसे सुनकर दोस्त और परिवार वालो ने कल्पना भी नहीं किया था और वो था बांकी जिन्दगी समाजसेवा..पहला प्रोजेक्ट ज्ञानोदय जो शिक्षा दान के माध्यम से समाज और देश को बेहतर और सुन्दर बनाने के लिये पूर्ण संकल्पित और प्रयासरत है..अब प्रेरणा श्रोत स्वर्गीय बाबूजी श्री अरुण झा जी को समर्पित करते हुए अरुणोदय कॉमर्स शिक्षा के अंतर्गत स्पार्टन ५० की शुरुवात कैलाश मठ, बनारस के संस्थापक आशुतोष जी महाराज और माननीय विधायक श्री सुधांशु शेखर जी के सानिध्य में किया गया|

श्री झा ने जोर देते हुए कहा की विगत १५ वर्षो में कॉमर्स के क्षेत्र में अपार संभावना सृजित हुइ है, जिसमे अकाउंटेंट, ऑडिट और कंसल्टिंग के साथ साथ बिज़नस फाइनेंस के क्षेत्र में कॉमर्स/फाइनेंस का दबदबा कायम हुआ है | बहुत से इंजिनियर अब इंजीनियरिंग के बाद mba फाइनेंस को अपनाते हुए फाइनेंस के क्षेत्र में अपने कैरियर का चयन कर रहे है| कंपनियों के अपैक्स डिसिजन बॉडी (Apex Decision Body) के रूप में बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में भी बिज़नस के साथ साथ फाइनेंस का दबदबा रहता है| हाल फ़िलहाल में NCERT बोर्ड ने भी व्यावसायिक शिक्षा के महत्व को समझते हुए एक एतिहासिक पहल करते हुए क्लास ६ से ही व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से व्यवसाय की बीज बोने की तैयारी में प्रयासरत है| परिणाम चाहे जो भी हो लेकिन बिहार के लाखों छात्र छात्राओ के लिए अरुणोदय कॉमर्स शिक्षा केंद्र एक अचुक दवा के रूप में देखा जा रहा है जहाँ प्रभाष झा अपने सहकर्मी चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपेश ठाकुर के साथ मिलकर कुछ ऐसा करने को पूर्ण संकल्पित दिख रहे है जो बिहार ही नहीं पुरे भारतवर्ष में एक बार पुनः एक बिहारी सब पे भारी को दुहराएंगे|

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