पटना से अनूप नारायण सिंह की रिपोर्ट


बिहार की राजधानी पटना से सटे फतुहा प्रखंड के दौलतपुर अलावलपुर गांव के समीप  स्थित बाबा ब्रह्म स्थान मंदिर का भभूत लगाने से ही श्रद्धालुओं के कष्टों  का निवारण हो जाता है ।आसपास के श्रद्धालु बताते हैं कि बरहम बाबा स्वयं खुले मैदान मे विराजमान है जबकि अपने भक्क्तों को आश्रय देते हैं। इसी कारण चाह कर भी भक्त उनका मंदिर नहीं बनवा पा रहे हैं. हालांकि उनकी पिंडी के अलावा चारों ओर मंदिर बनाने का कार्य प्रारंभ है.लोग बाबा स्थान मंदिर पहुंचकर अपनी मन्नतें रखते हैं तथा सफल होने पर वहां प्रसाद वितरण करते हैं. यही नहीं क्षेत्र में मवेशियों को किसी तरह का रोग सताने लगता है तो लोग बरहम बाबा स्थान का बहुत भभूत ग्रस्त मवेशियों को लगाते हैं. कोई भी दुधारू पशु बच्चे को जन्म देती है उसके उपरांत उसके दूध से उक्त मंदिर में खीर बनाकर प्रसाद वितरित करते हैं।

 जानकार बताते हैं कि करीब 400 वर्ष पूर्व राजस्थान से चलकर पाटलिपुत्र की धरती पर पुनपुन नदी के किनारे जहां पर फिल वक्त बाबा का मंदिर स्थित है सूरज चांद देव एवं थावरचंद देव  नामक दो भाइयों ने आकर अपना बसेरा बनाया था दोनों भाई काफी बलशाली थे। तथा उनसे खुश होकर मुगल शासक के नवाब ने कहा कि तुम भाइयों के अंदर अल्लाह का बल रहा है नवाब ने उन्हें बख्शीश में 22 बीघे जमीन दे दी विधि का विधान ऐसा हुआ कि कुछ समय के बाद दोनों भाइयों को शारीरिक कष्ट होने लगा इसी बीच उनके स्वप्न में बरहम बाबा आए और सेवा करने की बात कही । उसके बाद तन मन लगाकर दोनों भाइयों ने बरम बाबा की मिट्टी की पिण्डी बनाकर  पूजा अर्चना शुरू कर दी जिससे उनके कष्ट दूर हो गए समय बीतता गया और लोगों की आस्था मन्नत पूरी होने लगी थी। बाद के दिनों में यह स्थान ब्रह्म स्थान अलावलपुर निरोगधाम के नाम से पूरे राज्य भर में प्रसिद्ध हुआ। यह जन आस्था का केंद्र पटना ही नहीं राज्य भर के श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध है।बुखार के लिए मधुमेह हृदय रोग  के लिए  निरोगधाम संजीवनी साबित हो रहा है । यहां औषधीय पौधों की विशाल नर्सरी है और सभी पौधों से बीमारियों का मुफ्त इलाज किया जा रहा है। हालाकि पटना से सटे होने के बावजूद यहां किसी तरह का आवागमन का साधन नहीं होने से लोगों में रोष भी है ।यहां पहुंचने के लिए पैदल यात्रा करना सब की मजबूरीहै। निरोगधाम के संयोजक संजय कुमार सिंह ने बताया कि यहां लगे अर्जुन के वृक्ष के सेवन से हृदय रोगियों को फायदा पहुंचा है वही गिलोय के पौधे से ज्वार खत्म होता है जोंडिस कैंसर समेत दर्जनों जटिल रोगियों के लिए लगाए गए वृक्ष के सेवन से रोगियों को लाभ मिलता है। यहां एक अनूठा वृक्ष भी आपको सहज ही देखने को मिल जाता है। जिसका नाम कल्पवृक्ष है इस वृक्ष को शास्त्रों में भी सबसे  अचंभित वृक्ष माना गया है ।कहा गया है कि समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में एक रत्न  में कल्पवृक्ष भी था नवग्रह की शांति के लिए निरोग  धाम में कैलाश पीपल शमी पेड़ आम के पेड़ पौधे भी लगाए गए हैं यहां श्रद्धालुओं से किसी भी प्रकार का बाबा संस्थान के द्वारा चंदा स्वीकार नहीं किया जाता है। संस्थान के संयोजक संजय कुमार सिंह बताते हैं सब बाबा की कृपा है कि यहां पर श्रद्धालु श्रद्धा से जो कुछ भी अर्पित करते हैं उसे जन कल्याण के कार्यों में लगा दिया जाता है समय-समय पर देश दुनिया के ख्याति प्राप्त संत महात्मा इस दिव्य स्थल पर आकर कथा पूजन भी करते हैं आने वाले दिनों में यहां श्रद्धालुओं के लिए कई सारी सुविधाओं की व्यवस्था करने में शोध संस्थान लगा हुआ संजय बताते हैं कि पुनपुन नदी के किनारे अवस्थित इस स्थल  को आत्महत्या करने का डेंजर जोन था। जहां पर यह दिव्य स्थान अवस्थित है वहां पहले दर्जनों लोग जीवन से हताश निराश होकर पुनपुन नदी में छलांग लगा आत्महत्या कर लिया करते थे लेकिन जनश्रुति है कि जब से यहां बरहम बाबा की पूजा शुरु हो गई कोई दिव्य शक्ति यहां पर  जीवन से हताश निराश लोगों को ऐसा कृत्य करने से रोकती है।आस्था और विश्वास का यह केंद्र श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। अगर आप भी इस दिव्य स्थल का दर्शन करना चाहते हैं तो आप पटना गया मुख्य मार्ग में गौरीचक बाजार में अवस्थित पुनपुन नदी पुल को पार कर यहां आ सकते हैं।

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