बहराइच फसल अपशिष्टों को जलाये जाने के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए शासन की ओर से विभिन्न प्रकार के निर्देश निर्गत किये गये हैं। जिसमें किसानों द्वारा फसलों की कटाई के उपरान्त बचे हुए भूसे को जलाया जाना प्रतिषिद्ध किया गया है। इसके लिए शासन द्वारा कम्बाईन हार्वेस्टिंग मशीन मालिकों को स्ट्रारीपर का प्रयोग करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त फसल अपशिष्टों को मिट्टी में मिलाने के लिए रोटावेटर, हैपी सीडर, डिस्क हैरो एवं अन्य ऐसे कृषि यन्त्रों का प्रयोग करने की सलाह दी गयी है। 

यह जानकारी देते हुए उप निदेशक कृषि ने बताया कि जिलाधिकारी माला श्रीवास्तव ने जनपद के समस्त एसडीएम, तहसीलदार व खण्ड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया है कि फसलों के अवशेष जलाने वाले दोषी व्यक्तियों की पुष्टि होने पर दो एकड़ क्षेत्रफल के लिए रू. 2500=00, दो से पाॅच एकड़ क्षेत्रफल के लिए रू. 5000=00 तथा पाॅच एकड से अधिक़ क्षेत्रफल के लिए रू. 15000=00 का अर्थदण्ड लगाया जाये। जिलाधिकारी ने जनपद के किसानों से अपील की है कि फसलों के अवशिष्टों को जलाने के बजाय उसका वैज्ञानिक ढंग से उपयोग कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि करते हुए अपनी उत्पादकता बढ़ाये जिससे आय में इज़ाफे के साथ-साथ वातावरण को भी प्रदूषित होने से बचाया जा सके। 

उप निदेशक कृषि डा. आर.के. सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि फसल के ठूठों को भूमि में सड़ाने के लिए 25 कि.ग्रा. यूरिया प्रति हेक्टेयर की दर से प्रथम जुताई के समय भूमि में मिलाने से विद्यटन तीव्र प्रक्रिया से होता है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति तेज़ी के साथ बढ़ोत्तरी होती है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया अपनाकर जहाॅ एक ओर किसान अपने खेतों की उर्वरा शक्ति में इज़ाफा कर सकते हैं वहीं दूसरी ओर वायुमण्डल को भी प्रदूषण से बचाया जा सकता है

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