डॉ. भीम राव अंबेडकर ने विदेश जाकर अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल कर पहले भारतीय होने का गौरव प्राप्त किया था। इतना ही नहीं डॉ. अंबेडकर एक मात्र ऐसे भारतीय हैं जिनकी तस्वीर लन्दन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ लगी हुई है। 53 किताबों के लेखक अंबेडकर भारतीय संविधान के लेखक तो थे ही उन्होंने कुल 32 डिग्रीयॉ हासिल की थी। अर्थशास्त्र का नोबल प्राइज जीत चुके अर्थशास्त्री प्रो. अमर्त्य सेन डॉ. आंबेडकर को अर्थशास्त्र में अपना पिता मानते हैं।
                                            (14 अप्रैल अंबेडकर जयंती पर विशेष)

  कभी डा. बाबा साहेब अंबेडकर पूर्वज अंग्रेजी हुकूमत के मुलाजिम हुआ करते थे। उनके पिता ब्रिटिश इंडियन आर्मी में तैनात थे। अंबेडकर का जन्म ब्रिटिश भारत के मध्य भारत प्रांत (अब मध्य प्रदेश) में नगर सैन्य छावनी महू में 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। वे अपने माता-पिता की चौदहवीं और आखिरी संतान थे। इनका सरनेम अंबावडेकर था। लेकिन उनके शिक्षक, महादेव आंबेडकर, जो उन्हें बहुत मानते थे, ने स्कूल रिकार्ड्स में उनका नाम अंबावडेकर से आंबेडकर कर दिया। इंडियन फ्लैग में "अशोक चक्र" को जगह देने का श्रेय भी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को जाता है। बाबासाहेब मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में दो साल तक प्रिंसिपल पद पर कार्यरत रहे।

  बाबासाहेब भारतीय संविधान की धारा 370, जो जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देता है के खिलाफ थे। तो  उन्ही की वजह से फैक्ट्रियों में कम से कम 12-14 घंटे काम करने का नियम बदल कर सिर्फ 8 घंटे कर दिया गया था। तो डॉ. आंबेडकर ने स्त्रियों को मतदान का अधिकार देना बाबासाहेब की बडी जीत है। हिंदी, पाली, संस्कृत, अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, मराठी, पर्शियन और गुजराती सहित 9 भाषाओं के जानकार थे। 21 साल विश्व के सभी धर्मों की तुलनात्मक रूप से पढाई की है। उसके बाद आंबेडकर अपने 8,50,000 समर्थको के साथ बौद्ध धर्म दीक्षा लेना विश्व में एतिहासिक था जिसे विश्व का सबसे बडा धर्मांतरण कहा जा सकता है। अंबेडकर के जीवनकाल में ही वर्ष 1950 में कोल्हापुर में उनका स्टैच्यू बनवाया गया था। अपने जीवन में संघर्ष करते-करते अंबेडकर साहब 6 दिसंबर 1956 को उनका 65 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

  वर्ष 1954 में नेपाल,काठमांडू में हो रही "जागतिक बौद्ध धर्म परिषद" में बौद्ध भिक्षुओं नें डॉ बाबासाहेब आंबेडकर को "बोधीसत्त्व" यह बौद्ध धर्म की सर्वोच्छ उपाधी प्रदान की थी। भगवान बुद्ध , संत कबीर और महात्मा फुले इन तीनों महापुरूषों को अपना गुरू मानने वाले अंबेडकर ने कुल 9 सत्याग्रह किये थे। बाबा दलितों के जितने हिमायती थे उतने ही अन्य विरादरी का भी खुलकर मदद करते थे। बाबा साहेब ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना में बहुत अहम भूमिका निभाई। उनकी किताब The Problem of Rupee- Its Origin & its solution से इसके लिए कई सुझाव लिए गए। दामोदर घाटी परीयोजना , महानदी डॅंक, सोनघाटी बांध, दामोदर और हिंराकूड परीयोजना जैसे 15 बडे बांधों के निर्माण में बाबासाहेब ने अहम भूमिका निभायी जिसे पूरा भी कराया। आज भले ही आरक्षण को लेकर लड़ायी लड़ी जा रही है। लेकिन बाबा साहब ने सभी को समान अधिकार की बातें की थी। परंतु आज की तारीख में उनके पदचिन्हों पर चलने की बजाए हर कुछ राजनैतिकरण कर दिया गया है।
[4:47 PM, 4/14/2018] +91 95462 24277: भारत में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा मारवाड़ी यूनिवर्सिटी : डॉ. योगेश्वर प्रसाद कोस्टा
सबसे प्रतिष्ठित और गुजरात की केवल एक मात्र  NAAC A+ मान्यता प्राप्त संस्थान बिहार के छात्रो को राज्य कोटा के तहत प्रवेश प्रदान करता है

पटना। मारवाडी एज्युकेशन 2009 में शुरू किया गया और उसने गुजरात और साथ ही भारत में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। मारवाडी एजुकेशन निरंतर अपने छात्रों के समग्र विकास और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए प्रयास कर रहा है जो नैक द्वारा ए प्लस ग्रेड में परिलक्षित होता है। यह उपलब्धि इंजीनियरिंग और मेनेजमेंट शिक्षा में गुणवत्ता को बढ़ावा देगा और पूरे भारत के छात्रों को मारवाडी एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा निर्धारित मानक के साथ लाभ होगा। नैक के माध्यम से ए प्लस ग्रेड की स्थिति प्राप्त करना संस्थान में विभिन्न तरीकों से अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को समान रूप से लाभ देती है। उक्त बातें शनिवार को फ्रजर रोड स्थित गार्डन कोर्ट क्लब में आयोजित प्रेस-वार्ता के दौरान मारवाड़ी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. योगेश्वर प्रसाद कोस्टा ने कहीं। इस क्रम में उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय आकलन और प्रत्यायन परिषद (NAAC) एक ऐसा संगठन है जो भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIS) का मूल्यांकन और मान्यता प्राप्त करता है। यह भारत सरकार के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा वित्त पोषित एक स्वायत्त निकाय है जिसका मुख्यालय बंगलौर में है।

            यूजीसी की वेबसाइट के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2017 तक, भारत में 78 9 विश्वविद्यालय, 37,204 कॉलेज और 11,443 स्टैंडअलोन संस्थान हैं। ये संख्याएं अब तक बढ़ गई हैं  और तकरीबन 4 प्रतिशत से कम संसथान को NAAC द्वारा A + का प्रत्यायन मिला है और गुजरात के इंजीनियरिंग, एमबीए, एमसीए के 400 से अधिक कॉलेजों में मारवाड़ी एज्युकेशन NAAC द्वारा A + ग्रेड प्राप्त करने वाला गुजरात का एकमात्र संसथान इस वर्ष से विविधता और संस्कृति विनिमय के हेतु राजस्थान के छात्रोंको प्रवेश के लिए प्राथमिकता देगा
               हाल ही में  NAAC (राष्ट्रीय आकलन और मान्यता परिषद) पीर टीम ने नवंबर 2017 को पहले सप्ताह में मारवाडी कॉलेज राजकोट का दौरा किया था। NAAC  देश के उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन करता है और यह मानव संसाधन मंत्रालय और वर्तमान में यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) के अधीन एक स्वायत्त संगठन है। NAAC का उद्देश्य भारत में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने पर विशेष जोर देना है। NAAC की मान्यता संगठन की कार्यप्रणाली से निर्धारित होती है, और मान्यता से पहले, NAAC  ने निम्नलिखित विभिन्न मापदंडों पर संस्थान के प्रदर्शन के आधार पर 7 विभिन्न मानदंडों और समझौते ग्रेड पर अच्छी तरह से मूल्यांकन किया है।
1. शिक्षण पद्धतियां
2. लर्निंग – टीचिंग और एवोल्यूशन
3. रिसर्च – इनोवेशन और एक्सटेंशन
4. इन्फ्रास्ट्रक्चर और लर्निंग रिसोर्सेस
5. स्टूडेंट सपोर्ट और प्रोग्रेशन
6. शासन, नेतृत्व और प्रबंधन
7. संस्थागत मूल्य और सर्वोत्तम व्यवहार

किसी भी संसथान को A + ग्रेड प्राप्त करना इसके श्रेष्ठ गुणवत्ता का संकेत है| मुलाकात  के दौरान NAAC पीयर टीम अनुसंधान और नवाचार की तरह कारकों पर संस्था का मूल्यांकन करती है, प्रयोगशाला की गुणवत्ता, पुस्तकालयों जैसे विद्यालयों को एक डिजिटल, फैकल्टी प्रशिक्षण, कार्यशालाओं, विद्यार्थियों के कैरियर, शैक्षिक और गैर के लिए ली गई पहलों की गुणवत्ता प्रदान करती है

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