विनय कुमार मिश्र 
गोरखपुर।भारत सरकार जहां आए दिन स्वच्छता अभियान को धरातल पर लाने के लिए एक न एक कायदे कानून बना रही है वही लोग उस को अमलीजामा पहनाने में शर्म और संकोच महसूस कर रहे हैं।यह तस्वीर है चौरी चौरा तहसील के सरदारनगर ब्लॉक के केशवापट्टी गांव का जो नगर पंचायत मुंडेरा बाजार से एकदम सटा गाँव है।इस गांव के बने इज्जत घरों का हाल यह है कि लोगों के नाम से लाइन से बने इन इज्जत घरों का इस्तेमाल लोग करना शायद भूल गए हैं क्योंकि तस्वीर गवाह है कि अगर यह इज्जत घर इस्तेमाल होते तो शायद इस शक्ल और सूरत में ना होते।इन इज्जत घरों के चारों तरफ झाड़ झंझाड़ उगने के अलावा गंदगी का अंबार लगा हुआ है जो इज्जत घर की स्थिति बयां करने के साथ-साथ जिम्मेदारों पर सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर जिम्मेदार केवल इज्जत घर बनवाकर इस्तेमाल करने की सीख भी दे रहे हैं या बस कोरम पूरा करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ले रहे हैं।एेसी ही परिस्थितिया पहले भी थी जिसमें कोई भूसा कोई उपली गाईठा रखता था।जो भी हो इस तरह से गांव शौच मुक्त तो नहीं हो सकते हैं साथ में रोगमुक्त भी नहीं।जब तक लोग जागरुक और पुराने अंदाज का त्याग नहीं करेंगे तब तक गांव शौच मुक्त रोगमुक्त नहीं होंगे। इसके लिए कितना भी इज्जत घर क्यों न बनवा दिए जाएं।कुछ लोगों ने दबी जुबान यह भी कहा कि लोग पैसे की लालच में बनवा लिए और बिना गुणवत्तापूर्ण इज्जत घर का निर्माण करा लिए तथा इसे इस्तेमाल करना भूल गए हो।कहीं न कहीं खामियां ऊपर से नीचे तक है जिसकी वजह से ऐसी परिस्थतियाँ
उत्पन्न हो रही है।

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