अनूप नारायण सिंह

बिहार की राजधानी पटना से सटे फुलवारीशरीफ अंचल के गोनपुरा पंचायत की मुखिया आभा देवी इन दिनों चर्चा के केंद्र बिंदु में हैं आमतौर पर मुखिया अगर कोई महिला हो तो यही समझा जाता है कि वह अपने पति की छत्रछाया में ही कार्य करती होगी लेकिन आभा देवी ने इस मिथक को तोड़ते हुए एक मिसाल कायम की है।

 वे असल मुखिया हैं. दबंग भी हैं. वे अपने फैसलों को लागू करने में सक्षम हैं. कोई उन्हें हल्के में न ले, इसके लिए वे रिवाॅल्वर भी रखती हैं.

गोनपुरा पंचायत की दबंग मुखिया आभा देवी की पहचान रिवाॅल्वर वाली मुखिया के रूप में बन गयी है. जो दिखने में तो साधारण कद-काठी की हैं और इंटर पास हैं. आभा देवी का नाम  केवल गोनपुरा  पंचायत के लोग ही नहीं, बल्कि दूर दराज के पंचायतों में भी जाना जाता है. पंचायत के विकास के दौरान  जोखिम भरे मामलों से निबटने के लिए वे अक्सर रिवाॅल्वर अपने पास ही रखती हैं.गांव की बेटियां उनकी दिलेरी से रहती हैं खुश   खुले में शौच मुक्त पंचायत हो या फिर राशन दुकानों की गड़बड़ी, नाली-गली का निर्माण हो या फिर बेटियों के लिए स्कूल कॉलेज की सुविधा. सभी को लेकर उनकी जद्दोजहद देखते बनती हैं.  पंचायत में बेटियों को मैट्रिक के बाद इंटर तक की पढ़ाई के लिए कॉलेज खुलवाने से लेकर आठ आंगनबाड़ी भवन एवं पंचायत और सामुदायिक भवन तक बनवाने का श्रेय उन्हें जाता है. इन सारे कार्यों को करने के दौरान धमकियां भी मिलीं, लेकिन वे इसकी परवाह नहीं करती हैं. 2016 में दूसरी बार मुखिया के पद पर चुने जाने के बाद वह  लाइसेंसी रिवाॅल्वर रख कर काम कर रही हैं.किसान परिवार से था नाता   वे बताती हैं कि उनके पिता कृषक हैं. 1992 में मेरी शादी फुलवारी प्रखंड के गोनपुरा पंचायत के बभनपुरा गांव  में हुई थी. शादी के समय वह इंटर पास थी, पढ़ना चाहती थी. इसलिए बीए में नामांकन भी कराया. पर घर परिवार की जिम्मेदारियों के दौरान पढ़ाई पूरी नहीं कर पायीं. वह महिलाओं के लिये कुछ करना चाहती थीं.उनकी बात सुन कर घर के सभी लोगों ने उन्हें राजनीति में आगे आने के लिए तैयार किया. वह पहली बार 2011 में गोनुपरा पंचायत से मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ीं. उस चुनाव में 17 उम्मीदवार थे. चुनाव में जीत गयीं.    शुरुअात में थोड़ी परेशानी हुई. वे बताती हैं कि गांव के कुछ असामाजिक तत्व अड़ंगा लगाते हैं. नाली-गली के लिए अपनी एक इंच जमीन छोड़ने को तैयार नहीं होते हैं. पर लोगों को समझाने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी. पर इन सभी समस्याओं से जूझते हुए काम करवा रही हूं.दो बहनों की युगलबंदी  आभा रानी अपने गांव को बेहतर बनाने के लिए वह सब कुछ कर रही हैं, जो विकास के लिए जरूरी है. आठ वर्षों से मुखिया के पद पर कार्यरत रहने के बाद अपने पंचायत में उन्हें बदलाव का प्रतीक माना जाता है. आभा अकेली नहीं हैं, उनकी सगी बहन अर्चना भी बिहटा प्रखंड के गोढ़ना पंचायत समिति के सदस्य के रूप में काम कर रही हैं.महादलित परिवार की बेटियों को जोड़ रही हैं उच्च शिक्षा से  कौशल विकास योजना के तहत गांव की किशोरियों और महिलाओं का ग्रुप बना कर अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण दिया जा रहा है. पहले आभा  ने  लड़कियों को जागरूक किया.  इसके बाद कंप्यूटर ट्रेनिंग दिलायी. कई लड़कियां अब महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सिखा रही हैं . इसके लिए सरकार से लेकर एनजीओ तक का सहयोग लिया जा रहा है. गांव की बेटियां उनकी दिलेरी से रहती हैं खुश   खुले में शौच मुक्त पंचायत हो या फिर राशन दुकानों की गड़बड़ी, नाली-गली का निर्माण हो या फिर बेटियों के लिए स्कूल कॉलेज की सुविधा. सभी को लेकर उनकी जद्दोजहद देखते बनती हैं.  पंचायत में बेटियों को मैट्रिक के बाद इंटर तक की पढ़ाई के लिए कॉलेज खुलवाने से लेकर आठ आंगनबाड़ी भवन एवं पंचायत और सामुदायिक भवन तक बनवाने का श्रेय उन्हें जाता है. इन सारे कार्यों को करने के दौरान धमकियां भी मिलीं, लेकिन वे इसकी परवाह नहीं करती हैं. 2016 में दूसरी बार मुखिया के पद पर चुने जाने के बाद वह  लाइसेंसी रिवाॅल्वर रख कर काम कर रही हैं.

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