गोरखपुर से विनय कुमार मिश्र
सामने आया कफील खान का एक और सच।
गोरखपुर ब्यूरों।गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक वॉर्ड के पूर्व इंचार्ज डॉक्टर कफील खान के बारे में पीड़ित के परिजनों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।वंदना के परिजनों ने आरोप लगाया है कि मेडिस्प्रिंग अस्पताल के कैलेंडर गांव-गांव में बंटे थे जिसमें डॉक्टर कफील खान की फोटो है।गौरतलब है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई त्रासदी के चलते पेट्रियोटिक वार्ड के नोडल ऑफिसर डॉक्टर कफील खान को उनके पद से हटाया दिया गया है। उन पर अपनी प्राइवेट क्लीनिक चलाने का आरोप है।मेडी स्प्रिंग हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर का यह कैलेंडर हर एक गांव और गली में बांटा गया है।हालांकि यह कोई हैरानी की बात नहीं है। लेकिन खास बात यह है कि कैलेंडर के नीचे कफील खान की तस्वीर है और उनका नाम भी लिखा हुआ है। सवाल खड़ा होता है कि अगर डॉक्टर कफील खान इस अस्पताल में प्रेक्टिस नहीं करते तो फिर उनकी फोटो लगा हुआ यह कैलेंडर गांव-गांव में क्यों बांटा गया।
कफील की कहानी चश्मदीद और पीड़ित की जुबानी
पीड़ित परिवार के उमेश कहते हैं कि डॉक्टर कफील खान शुक्रवार सुबह वार्ड में आए और फिर डॉक्टरों के कान में उन्होंने कुछ ऐसा कहा जिससे सब डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी हरकत में आ गए।गयारह साल की वंदना भी उस वक्त 100 नंबर वार्ड में भर्ती थी।रात भर उसके चाचा उमेश उसकी देखभाल कर रहे थे और उस वक्त वहां मौजूद थे।उमेश का कहना था कि रात को जब ऑक्सीजन सप्लाई खत्म हुई तब एक डॉक्टर ने उससे कहा कि वह मेनुअल पंप के जरिए वंदना को ऑक्सीजन दे। रात भर यूं ही उमेश वंदना के बगल में बैठे हुए अपनी भतीजी की सांसों को गिनता रहा फिर सुबह एक डॉक्टर जो वंदना को देखने आया उसने वंदना की सारी मशीनें हटा दीं। वंदना का बदन पीला पड़ गया था। मानो वह गहरी नींद में सो रही हो।
कफील की बात ने उड़ाए थे डॉक्टरों के होश
उमेश की मानें तो डॉक्टर कफील खान को तब पहचाना जब उनकी तस्वीर मीडिया में चलती देखी।तस्वीर देखकर उसको याद आया कि डॉक्टर कफील खान वही डॉक्टर हैं जो सुबह-सुबह वार्ड नंबर 100 में आए थे ।उनका चेहरा लाल पड़ा हुआ था और माथे से पसीना छूट रहा था। डॉक्टरों के पास डॉक्टर कफील खान ने कुछ ऐसा कहा जिससे वहां मौजूद तमाम डॉक्टर हरकत में आ गए।यहां तक कि जो डॉक्टर कुर्सी में बैठे मजे की नींद ले रहे थे वह भी जल्दी टोपी और कोट पहन के ड्यूटी पर लग गए।अफरातफरी का हाल यह था कि जिन मरीजों के शरीर से सारी मशीनें हटा ली गई थीं डॉक्टर ने जाकर उन पर वापस मशीन लगा दी।
डॉक्टर ने किसी से बात ना करने की दी थी हिदायत
पीड़ित परिवार के सदस्य छोटे लाल का कहना है कि जब वह सुबह वार्ड के अंदर आया तो एक डॉक्टर ने उससे कहा कि वंदना की मृत्यु हो चुकी है और वह चुपचाप पीछे के दरवाजे से वंदना की बॉडी को ले जाए। डॉक्टर ने यह भी हिदायत दी कि इस दौरान किसी से बातचीत ना करे।

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