जिलाधिकारी द्वारा राजस्व ग्रामों की खतौनी के पुनरीक्षण व खतौनी में
अंकित प्रत्येक खातेदार/सहखातेदार के गाटों के अंश का निर्धारण की समय
सारिणी जारी।
        सुलतानपुर
 जिलाधिकारी विवेक ने राजस्व ग्रामों की खतौनी के पुनरीक्षण व खतौनी में
अंकित प्रत्येक खातेदार/सहखातेदार के गाटों के अंश का निर्धारण करने हेतु
समय सारिणी जारी की है। जिलाधिकारी ने बताया कि जिले के 252 राजस्व
ग्रामों के खतौनी का पुनरीक्षण व अंश निर्धारण किया जाना है। उन्होंने
उपजिलाधिकारियों को राजस्व ग्रामों के खतौनी के पुनरीक्षण व उसमें दर्ज
खातेदारों /सहखातेदारों के अंश निर्धारण हेतु समय सारिणी के अनुसार सूचना
के प्रकाशन के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने सम्बन्धित ग्रामों की सूची
जिलाधिकारी कार्यालय, अपर जिलाधिकारी कार्यालय , सम्बन्धित  उपजिलाधिकारी
कार्यालय एवं सम्बन्धित तहसीलों के खण्ड विकास अधिकारी कार्यालयों तथा
ग्राम पंचायत में चस्पा किये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि
31 अगस्त तक खतौनी में दर्ज खातेदार/सहखातेदारों के खातावार एवं अंश गाटा
नम्बरवार अंश को प्रारम्भिक रूप से खातेदार/सहखातेदारों एवं ग्राम राजस्व
समिति के परामर्श से लेखपाल द्वारा आकार पत्र संख्या ख.पु. -2 में तैयार
किया जाना है। उन्होंने बताया कि 01 सितम्बर 2018 से 30 सितम्बर 2018 के
मध्य लेखपालों द्वारा खतौनी में खातेदारों /सहखातेदारों के गाटा नम्बरवार
प्रस्तावित अंश के उद्धरण को आकार पत्र-ख.पु.-3 में तैयार किया जाना व
राजस्व निरीक्षक द्वारा समस्त खातेदारों/सहखातेदारों को आर.सी.प्रपत्र-8
में नोटिस जारी कर लेखपाल के माध्यम से तामील कराया जाना है। इसी प्रकार
01 अक्टूबर 2018 से 31 अक्टूबर 2018 तक खातेदारों/सहखातेदारों द्वारा
प्रारम्भिक रूप से किये गए अंश के निर्धारण के विरूद्ध आपत्ति/शुद्धिकरण
हेतु आकार पत्र-ख.पु.-3 में विवरण अंकित करते हुए, यथावश्यक अभिलेखों
/प्रमाणों सहित सम्बन्धित लेखपाल अथवा राजस्व निरीक्षक अथवा रजिस्ट्रार
कानूनगो को प्राप्त कराया जाना है। राजस्व निरीक्षक द्वारा ग्राम राजस्व
समिति से परामर्श स्थानीय जांच-पड़ताल एवं पक्षों के मध्य सुलह समझौते के
आधार पर आपत्तियों का निस्तारण कर अंश निर्धारण आदेश 01 नवम्बर, 2018 से
15 दिसम्बर 2018 तक पारित करना है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार समय
सारिणी के अनुसार 01 दिसम्बर 2018 से 15 दिसम्बर 2018 तक
खातेदार/सहखातेदा की अनिस्तारित आपत्तियों को राजस्व संहिता की धारा -116
के अन्तर्गत उपजिलाधिकारी को निर्णय हेतु अग्रसारित करना है।

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