मेले हमारी संस्कृति के प्रतीक-राजपुरोहित
-सायला में चल रहे द्वितीय पशु मेले का समापन
गेबाराम चौहान, सायला। उपखण्ड मुख्यालय पर श्री कात्यायनी माता पशु मेला समिति एवं ग्राम पंचायत सायला के सयुंक्त तत्वावधान में आयोजित द्वितीय पशु मेला एवं अश्व प्रर्दशनी का वालेरा महंत पारस भारती, दादाल महंत विजयानन्द महाराज के सानिध्य में पुरस्कार वितरण के साथ समापन  हुआ।
समारोह में मुख्यअतिथि के नाते समिति के सरंक्षक व सायला सरपंच सुरेश राजपुरोहित मौजूद थे। अध्यक्षता सरंक्षक गजेंद्रपालसिंह बालावत ने की।बतौर अतिथि के रूप में मेला समिति अध्यक्ष उत्तमसिंह धवेसा , निर्णायक गंगासिंह मौजूद रहे।
सरंक्षक व सायला सरपंच राजपुरोहित ने कहाकि मारवाड़ी नस्ल के घोड़ो के सरक्षण व सवर्धन के लिए मेलो के आयोजन की महती आवश्यकता है।मेले हमारी संस्कृति के प्रतीक है।मेलो में सर्वश्रेष्ठ नस्ल के घोड़ो ब्रिड से उन्नत नस्ल तैयार की जाती गई।जिससे मारवाड़ी नस्ल के घोड़ो को देशभर में पहचान मिल रही है।वही मेले के  सफल आयोजन में अश्वपालको को पूर्ण रूचि के साथ भाग लेने एवं सहयोग की अपील की।सरंक्षक गजेंद्रपालसिंह बालावत ने बताया कि सायला क्षेत्र मारवाड़ी नस्ल के घोड़ो का उत्पती क्षेत्र होने के कारण फिल्म स्टार तथा बड़े उद्योगपति क्षेत्र में खरीददारी के लिए आ रहे है।घोड़ो के पीछे क्षेत्र की पहचान कायम हो रही है। मंच संचालन प्रवक्ता रविंद्रसिंह राणावत ने किया। पशुपालन विभाग के पूर्व सयुक्त निदेशक गणपतसिंह बालोत ने मारवाड़ी नस्ल के घोड़ो की जानकारी दी। सचिव पन्नेसिंह बालावत ने समापन की घोषणा की। इस दौरान थानाधिकारी सवाईसिंह, अहमदाबाद से कुमार ठाकुर,पंजाब से बबलजीत सिंह,प्रवीण कोठारी ,धनराज चौधरी, उपाध्यक्ष मंगलसिंह दहिया, हड़मतसिंह सोढा, बलवन्तराज पुरोहित,सुखसिंह आकवा, पांडवसिंह ,पशु कम्पाउडर नरपतसिंह, नाथूसिंह राठौड़ ,शैलेंद्रसिंह भाटी ,अजीतसिंह राठौड़, करणसिंह मेड़तिया ,सुखदेव सिंह चारण, पँचायत कार्मिक शांतिलाल, भीखाराम, जेताराम, रणजीत कुमार समेत कई जने मौजूद थे।
इन्होंने निभाई निर्णायक की भूमिका
पशु मेले के समापन के अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
जिसमे निर्णायक की भूमिका आनंदसिंह, गंगासिंह व अंनतसिंह ने निभाई।
यह रहा परिणाम
अदन्त बछेरी में प्रथम रणोदर के वीराराम,द्वितीय सायला के माधुसिंह,तृतीय सायला के  लालसिंह रहे। इसी तरह अदन्त बछेरा में प्रथम मोकनी के मदरूपसिंह,द्वितीय सायला के महेंद्रसिंह, तृतीय स्थान चोरा के श्रवण कुमार का रहा। वही दो दन्त बछेरी में प्रथम देबावास के  अर्जुनसिंह, द्वितीय दुदवा के फतेहसिंह व तृतीय नेनावा के पहाड़सिंह की बछेरी रही। जबकि दो दांत बछेरा में प्रथम सायला के गणपतसिंह राजपूत, द्वितीय  सरदारगढ़ के चंपालाल व तृतीय सरदारगढ़ के दिनेश कुमार गुर्जर का बछेरा रहा। वही सांड घोडा में प्रथम रेवतड़ा के नारायणसिंह,द्वितीय बासनीकला में अभिमन्युसिंह व तृतीय आकवा के सुखसिंह का घोडा रहा।इसी प्रकार प्रजनन घोड़ी योग्य में प्रथम काकाणी जोधपुर के कुलदीपसिंह,द्वितीय जालोर के जालमसिंह चारण व तृतीय कुंडल के देवीसिंह की घोड़ी रही।

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