विनय कुमार मिश्र गोरखपुर ब्यूरों।
1862 से पूर्वांचल की ऐतिहासिक श्री रामलीला भूमि बर्डघाट पर मंचन करते चले आ  रहे  जिसे नगर निगम महापौर सीताराम जायसवाल फर्जी तरीके से कहते हैं कि यह जमीन नगर निगम की है। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब गोरखपुर में पंकज गोयल अध्यक्ष रामलीला कमेटी वर्डघाट अनूप अग्निहोत्री महामंत्री सुशील गोयल संरक्षक ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर बताया कि जिस जमीन को गोरखपुर नगर निगम के महापौर सीताराम जायसवाल कहते हैं कि यह जमीन नगर निगम की है उस जमीन पर महापौर की नियत खराब हो गई है इसलिए कहते हैं कि यह जमीन नगर निगम की है जो कि 1862 से रामलीला का मंचन यहां पर होता चला आ रहा है। श्री रामलीला कमेटी वर्ड घाट रजिस्टर्ड 1962 से है और 1962 से नगर निगम में सर्वसम्मति प्रस्ताव द्वारा रामलीला भूमि पर कब्जा आधार के रूप में स्थापित है जो नगर निगम के अभिलेखों में भी वर्णित है श्री रामलीला कमेटी की आगामी योजना संविधान में दिया है उसी आधार पर स्पष्ट करना चाहता हूं कि इस भूखंड का सुंदरीकरण कर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के कथाओं के आधार पर एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर पूर्वांचल की ऐतिहासिक लीला भूमि की रचना का प्रयास निरंतर चल रहा है और आगे भी योजना भी है लेकिन कुछ लोग इस जमीन पर  मंशा व नियत खराब हो गई है जो इस जमीन पर व्यवसायिक कांप्लेक्स भूखंड बनाना चाहते हैं जो धर्मांतरण यहां की हिंदू  जनता कभी पूरी नहीं होने देगी। इस प्रेस वार्ता के मार्फत अवगत कराना चाहता हूं कि श्री रामलीला कमेटी वर्ड घाट उपरोक्त प्रस्ताव की घोर निंदा करती है प्रार्थना करती है कि इस पवित्र त्यौहार को आंदोलित करने से बाज आएं और उपयुक्त प्रस्ताव व्यवसाय कंपलेक्स आदि इस भूमि पर करने का इरादा तत्काल वापस लेने की घोषणा करें। मुख्यमंत्री एवं सभी हिंदू जनमानस के प्रतीक की छवि को धूमिल न करें। रामलीला कमेटी वर्ड घाट का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलकर इस प्रस्ताव को वापस लेने तथा रामलीला भूमि वर्ड घाट आराजी नंबर 279 रकबा 80.04 डिसमिल का निस्तारण शीघ्र से शीघ्र कम से कम किराए पर कराने का अनुरोध करेगी।

Post A Comment: