गेबाराम चौहान, सायला।
धानसा गाँव में शारदीय नवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित शतचण्डी महायज्ञ में सोमवार को पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
श्री पंचदशनाम जुना अखाड़ा, वाराणसी के अन्तर्राष्ट्रीय मंत्री एवं श्री दूधेश्वर नाथ मठ, गाजियाबाद के महन्त श्री श्री 1008 श्री नारायणगिरीजी महाराज के सानिध्य में शतचण्डी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ के मुख्य आचार्य तोयराज उपाध्याय द्वारा पूरे विधि-विधान से मंत्रोच्चार के साथ  शतचण्ड़ी महायज्ञ को सम्पन्न करवाया जा रहा है।
महन्त नारायणगिरीजी के दर्शन करने अौर कार्यक्रम में भाग लेने दूर-दराज से लोग आ रहे है।
नवरात्रि में आज यज्ञ के षष्ठम दिन में मां कात्यायनी का पूजा किया गया एवं आवाहित सभी देवी देवता का पूजा किया गया और मां भगवती का उत्तम चरित्र का हवन महाराज श्री महंत नारायण गिरी के सानिध्य में धानसा गांव के लोगों ने बड़ी श्रद्धा से पूजा एवं हवन किया। आज  षष्ठी के अवसर पर कात्यायनी  माता का पूजन हुआ। सभी यजमानों के द्वारा यज्ञशाला में गणेश, अंबिका, वरुण, कलश,  षोडश मातृका,  वास्तुमण्डल, क्षेत्रपाल, नवग्रह एवं प्रधान देवी श्री महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती दुर्गा देवी का पूजन वेदोक्त मंत्रों द्वारा एवं भगवती सांब शिवा का रुद्राभिषेक एवं ब्राह्मणों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ एवं हवन मां भगवती की आरती प्रसाद आदि से आज का पूजन संपन्न हुआ।
महन्तजी ने भक्तों को प्रवचन देते हुए बताया कि कात्यायनी नवदुर्गा या हिंदू देवी पार्वती (शक्ति) के नौ रूपों में छठवें रूप है| यह अमरकोष में पार्वती के लिए दूसरा नाम है, संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, हैमावती, इस्वरी इन्हीं के अन्य नाम हैं | शक्तिवाद में उन्हें शक्ति या दुर्गा, जिसमे भद्रकाली और चंडिका भी शामिल है, में भी प्रचलित हैं| यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक में उनका उल्लेख प्रथम किया है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थी , जिन्होंने देवी पार्वती द्वारा दी गई सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया | वे शक्ति की आदि रूपा है, जिसका उल्लेख पाणिनि पर पतांजलि के महाभाष्य में किया गया है, जिसे दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में लिखी गयी थी | उनका वर्णन देवी-भागवत पुराण, और मार्कंडेय ऋषि द्वारा रचित मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में किया गया है जिसे ४०० से ५०० ईसा में लिपिबद्ध किया गया था | बौद्ध और जैन ग्रंथों और कई तांत्रिक ग्रंथों , विशेष रूप से कालिका-पुराण (१० वीं शताब्दी) में उनका उल्लेख है, जिसमें उद्यान या उड़ीसा में देवी कात्यायनी और भगवान जगन्नाथ का स्थान बताया गया है |
कार्यक्रम में प्रतिदिन रात्रि में भजन संध्या का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें शनिवार रात्रि में जीवन बारौठ म्यूजिकल ग्रुप, सुमेरपुर के बैनर तले गणेश बुरासिया एण्ड़ पार्टी और डान्सर जीतू मेवाड़ी अौर बिन्दु मेवाड़ी ने प्रस्तुति देते हुए देर रात्रि तक पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम में धानसा गाँव के समस्त ग्रामवासी तन-मन-धन से सहयोग कर रहे है। इस मौके पर
विष्णुस्वरूप महाराज, गायत्री आश्रम सांथू, संत श्री परशुराम महाराज, कानाना मठ रोहट पाली, RAS हरीसिंह लाखावास, ठा.प्रधुम्नसिंह भंवरानी, शिवदत्तसिंह  भैंसवाड़ा, कुं दलपतसिंह थलवाड़, ईश्वरसिंह बैरठ,   गजेन्द्रसिंह राणावत निम्बावास सहित सेरणा, मोदरान, धानसा के सैकड़ों लोग मौजुद थे।

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