परीक्षा में संस्थागत त्रुटि से विलखता युवावर्ग

#दारोगा_भर्ती

आज जब इस बेरोजगारी के आग में पूरा देश झुलश रहा है और इसमें सबसे ज्यादा परेशान हो रहे है हमारे बिहार के युवा

क्योंकि बिहार में न तो कोई बड़े कारखाने और औधौगिक इकाइयां है और न कोई प्राकृतिक संपदा।

यहां के छात्रों का भविष्य सिर्फ सरकारी नौकरी पर टिका हुआ है।
यही कारण है कि देश के किसी भी परीक्षा में बिहारी छात्रों का जलवा देखने को मिलता है।

लेकिन ये छात्र आज के समय मे सबसे ज्यादा परेशान हो रहे है।
क्योंकि यहां पर एक तो vacancy नही आती है और अगर vacancy आती भी है तो इसके परीक्षा में इतना समय लगता है कि छात्र उम्मीद ही छोड़ देते है।
और अगर किसी तरह से परीक्षा सम्पन्न कराई जाती है तो वह कुछ घोटालेबाज़ और संस्था की मिलीभगत से leak करा लिया जाता है।

परिणामतः वह vacancy लटकी रह जाती है।

ऐसा शायद ही किसी अन्य राज्य में होता होगा कि छात्र 2004 में दरोगा भर्ती के लिए आवेदन करे एवम उनका selection 2016 में हो।

कमोबेश यही हाल यहां की हरेक परीक्षा का है।
आखिर छात्रों पर हो रहे इस अत्याचार का जिम्मेवार कौन है?
किसकी गलती की सजा हर बार बिहारी छात्र भुगतते है?

हमारी सरकार जो लाठियां बरसाने में तो सबसे आगे रहती है, अगर exam leak हुआ और छात्रों ने विरोध किया तो उनके समस्या का समाधान लाठी से करती है।
लेकिन अगर एक exam सही तरीके से सम्पन्न कराना हो तो पूरे संस्था, प्रशासन और सरकार के हाथ पैर फूल जाते है।
और अब तो परीक्षा देने से पहले ही छात्र यह कहते हुए पाए जाते है कि क्या तैयारी करें, exam तो leak होना ही है। और होता भी है।

और अगर किसी तरह से आगे बढ़ गए तो result देने में घोटालेबाजी सामने आ जाती है।
जैसा कि आज न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि mains के result में धांधली हुई है और इसका रिजल्ट पुनः जारी होना चाहिए।
लेकिन इसमें धांधली की शुरुआत तो pt से ही हो गयी थी।
जिसके विरोध में छात्रों ने लाठियां खाई थी और मामला न्यायालय में ले गए थे। इसका फैसला अभी आया नही है और हमे न्यायालय पर विश्वास बनाये रखना होगा क्योंकि अगर इसमें लीक हुआ होगा तो न्यायालय अपना फैसला सुनाएगा
इसके अलावा इस mains के result में महिला आरक्षण की सीट clear नही हुई कि कितनी सीट के लिए कितनी महिलाओं का चयन हुआ है और result भी category wise जारी नही हुआ।
इसमें पास और fail होने वाले अभ्यर्थियो को पता ही नही है कि cutoff कितना गया।।
इन सब बातों से पता चलता है कि घोटाला तो हुआ है और इसका पर्दाफाश भी होना चाहिये।

Exam के बाद carbon copy हरेक central और state govt के exam में उपलब्ध कराया जाता है।
और इसके बाद answerkey उपलब्ध कराके आपत्ति ली जाती है।
लेकिन ये चीजें तो यहां होता ही नही है
Exam के बाद छात्रों को न तो carbon copy दी जाती है और न ही answerkey दिया जाता है।
जिससे छात्र अपने परफॉरमेंस के बारे में जान पाए और गलत उतर पे अपनी आपत्ति दर्ज करा पाए।

और निश्चित तौर पर धांधली की शुरुआत इन्ही स्थानों से होती है।
हर बार fail होने पर भी सरकार कोई कठोर क़दम नही उठाती है मजबूरन यहां के पढ़नेवाले छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
यहां के छात्रों के पास इतना पैसा नही होता कि हरबार सरकार के इस नाकामयाबी को न्यायालय के समक्ष ला सके।
और जब भी सरकार की नाकामयाबी को न्यायालय के समक्ष लाया गया है इनके संस्था की घोटालेबाजी जगजाहिर हुई है।

इन्ही सब वजहों से जो 'बिहार' देश मे अव्वल रहा है उसे बदनामी का दंश झेलना पर रहा है।
जो 'बिहारी' शब्द गर्व का विषय है अन्य राज्यो में गाली के तौर पर प्रयोग किया जाता है।
यहां के छात्र अपना आत्मविश्वाश खोकर private नौकरी के लिए अन्य राज्यो में जाते है और वहां से उन्हें भगाया जाता है।

अब सरकार को चाहिए कि जितने भी पद खाली पड़े है सबको भरने की प्रक्रिया शुरू करे एवं बाकी के exam के नियमो में अतिशीघ्र बदलाव करे।

परीक्षा की प्रणाली साफ सुथरी हो एवम exam fair हो इसके लिए सरकार को कठोर कदम उठाने होंगे।
परीक्षा केंद्र की सुरक्षा एवम वहां धांधली न हो इसके लिए अधिक संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए जाए।
जरूरत पड़ने पर अर्धसैनिक बलों का भी प्रयोग किया जाए।

सभी छात्रों को metal detector से जांच के उपरांत ही परीक्षा केंद्र में entry मिले।

परीक्षा केंद्र के भीतर invegilator की संख्या अधिक हो एवम उनपर भी नजर रखने के लिए अधिकारी को जिम्मेवारी दी जाए।
परीक्षा केंद्र के बाहर परीक्षा के समय धारा 144 लागू रहे एवम परीक्षा केंद्र पर जैमर का प्रयोग हो।

परीक्षा उपरांत छात्रों को omr की carbon copy और qn booklet दिए जाएं
और इसके बाद जरूरी रूप से answer key जारी हो और उनपे आपत्तियां ली जाए और उनका निपटान हो।

और सबसे बड़ी पारदर्शिता के लिए सभी छात्रों का result pdf एकसाथ उनके नाम, date of birth reg no., roll no., address, और total marks के साथ जारी हो न कि सिर्फ roll number wise

तभी सरकार की विश्वसनीयता बनी रहेगी और छात्र पूरे आत्मविश्वास के साथ तैयारी कर पाएंगे।

गुरु डा एम रहमान
संस्थापक
अदम्या अदिति गुरूकुल

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