रेत के जादुगर मधुरेन्द्र ने भी भावूक होकर यूं अंदाज में दी, कादर खान को श्रंद्धाजलि।

मशहूर सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र ने बालू पर आकृति उकेर, कादर खान को दी श्रंद्धाजलि

घोड़ासहन, पूर्वी चंपारण : हिंदी सिनेमा जगत के जाने माने दिग्गज अभिनेता कादर खान अब हमलोग के बीच नहीं रहे। इसको लेकर बॉलीवुड में शोक की लहर हैं। फिल्मी सितारों से लेकर राजनीतिक हस्तियों और आम लोगों ने उन्हें सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रही हैं। इधर सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र भी अपनी रेत कला के जरिये अपनी शोक प्रकट की हैं। पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन में बुधवार को मशहूर सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र ने बालू पर आकृति उकेर कादर खान को श्रंद्धाजलि दी हैं। वही एक-एक कर कतारबद्ध होकर श्रंद्धाजलि देने के लिए लोगों का जन सैलाब उमड़ पड़ी हैं।

सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र ने बताया कि कादर खान बॉलीवुड में साल 1973 से हैं। उन्होंने फिल्म 'दाग़' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इस दौरान उन्होंने अपने करियर में हर तरह की फिल्में की। विलेन, कॉमेडियन, गंभीर किरदार से लेकर अंधे तक का रोल उन्होंने बखूबी निभाया। क़ादर ख़ान एक हिन्दी फ़िल्म हास्य अभिनेता होने के साथ साथ एक फ़िल्म निर्देशक भी हैं। उन्होंने अबतक 300 से अधिक फ़िल्मो में काम किया है और 1970 और 1980 के दशक के जाने माने स्क्रीनराइटर भी रहे हैं। कादर खान ने फिल्मों में एंट्री करने से पहले सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों को पढ़ाया भी था। कादर खान अपने संजीदा और कॉमेडी दोनों ही तरह के किरदारों के लिए खास पहचान रखते हैं। गोविंदा के साथ तो कादर की कमाल की ट्यूनिंग रही है।उनकी पहली फ़िल्म दाग थी जिसमे उन्होंने अभियोगपक्ष के वकील की भूमिका निभाई थी। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई इस्माइल यूसुफ कॉलेज से पूरी की। उन्होंने एक शिक्षक के रूप में भी कार्य किया।

मौके पर डॉ राजदेव प्रसाद, सरबजीत महतो, अनिल सिंह, रामजन्म पटेल, सुरेश कुशवाहा, सुरेश, महेश, मनोज, पंकज, विकाश, राजेश, मोहन, धर्मेंद्र, दिनेश, राकेश, शुशील, मो इस्लाम, रवि, धीरज, टेनी, जाहिद, जाकिर सहित सैकड़ों प्रबुद्ध नागरिकों तथा गणमान्य लोगों ने भी मधुरेन्द्र द्वारा बालू पर बनाएं गये कादर खान के प्रतिमा पर गुलाब फूल चढ़ाकर भावपूर्ण श्रंद्धाजलि दी।

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