अश्लील गाना समाज के लिए है, भयंकर खतरनाक : पूर्व सैनिक धीरज सिंह


जिला रिपोर्टर धर्मपाल पटेल
    सहयोगी  प्रेम कुमार
      पी न्यूज वैशाली

प्रशासन सिर्फ फरमान सुनाती है जिसे सख्ती से लागू करना चाहिए

सड़कों पर अश्लील गीतों और अश्लील फिल्मों के पोस्टर पर कब लगेंगे प्रतिबंध।

वैशाली:-बिहार में खुलेआम घूम मची है अश्लीलता फैलाने वाले गीतों पर पूर्व सैनिक धीरज कुमार सिंह ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दावा हैं कि बिहार की हर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को सरकार द्वारा मिलने वाली प्रोत्साहन राश‍ि ड्रेस और साईकिल मिल तो रही हैं। उन्होंने बताया कि बिहार की महिलाओं-लड़कियां जब बाजार,चौक-चौराहे पर होती या बस ,ऑटो रिक्शा की सवारी करती हैं तो वे कितना शर्मिन्दगी महसूस करती हैं जिसका अंदाजा लगाना बड़ी मुश्किल है। आपको बताते चलें कि आज-कल बिहार मे भोजपुरी में अश्लील गानों का इस कदर बोलबाला हो गया है कि विवाह या पूजा-त्योहार के समय गांव शहर में अलग-अलग जगहों से गुजरते हुए भोजपुरी की भाषाई ऑडियो संस्कृति से भी दो चार होना पड़ रहा है। सुनने के बाद तो खुद में इतनी शर्मिंदगी महसूस होती है कि लगता है क्या करूँ। श्री सिंह ने कहा कि डीजे के नाम पर दिल में दर्द देने वाली आवाज़ और ऊपर से उसी गानों पर नशे में लोग झूम उठते हैं। जिन अश्लील भोजपुरिया गानों पर ठुमके लगाये जाते हैं वे महिलाओं के कानों में भी पड़ते हैं लेकिन कोई आवाज नहीं उठाता है सुबह उठो तो यात्री बस में ये गाने सुनने को मिल जायेगा। उन्होंने कहा कि भोजपुरी गाने जैसे जिला टॉप लागे लू,चुम्मा मांगेला मस्टरवा,मुखिया जी मन होखे त बोली जैसे तमाम वाहियात गाने हमारे समाज में जहर घोला जा रहा है। प्रशासन सिर्फ फरमान सुनाती है जिसे सख्ती से लागू करना चाहिए हमारा समाज व्यावहारिकता के नाम कितना खोखला होता जा रहा है। बस नौटंकी शैली बाक़ी है। आइटम सॉन्ग डिस्को में नहीं बल्कि खेतों में फ़िल्मायें जा रहे हैं। आप इन गानों से गुज़रते हुए अलग दुनिया में चले जाते हैं। हमारी नज़रों से अनजान यह दुनिया चुपचाप फलफूल रही है। इसका अपना एक स्वतंत्र बाज़ार है। भोजपुरी गानों की अश्लीलता और भौंडापन गंभीर समस्या है। सारे गाने ऐसे तो नही हैं पर भोजपुरी सिनेमा इस जाल में फंस चुका है। जबकि सरकार से लेकर समाज को इससे कोई सरोकार नहीं है। श्री धिरज सिंह ने कहा कि अब देखना यह है कि संस्कृति मंत्रालय कब नींद से उठेंगी। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व प्रशासन भी अश्लीलता पर चुप्पी साधे हुए हैं और न ही समाज के ठेकेदारों को मतलब है। और न तो कोई समाजसेवी संगठन आगे आया और न ही सरकार ने कोई आश्वासन दे रहा है।

Post A Comment: