एक ही है परिवार के तीन लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत।

मुखिया की लाश रेलवे ट्रैक से बरामद।

विनय कुमार मिश्र गोरखपुर ब्यूरों। राजघाट थाना के हसनगंज में एक ही परिवार के तीन लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना से पुरा शहर सन्न रह गया। मरने वालों में सरिता गुप्ता पत्नी रमेश प्रसाद 45 वर्ष, पायल गुप्ता पुत्री रमेश 15 वर्ष व आयुष गुप्ता पुत्र रमेश 10 वर्ष शामिल है। जबकि परिवार में केवल रजत गुप्ता और लड़की रचना गुप्ता ही बचे हैं। लड़का परिवार के साथ में नही था जबकि लड़की रचना की हालत नाजुक बताई जा रही है रविवार शाम रचना की भी मेडिकल कालेज में मौत हो गई । स्थानीय लोगों के अनुसार रमेश गुप्ता व्यवसायी थे और महेवा मंडी में उनका खुद का कारोबार था ।बताया जा रहा है कि वर्तमान में वह कर्ज में डूबे थे और रविवार सुबह ही रमेश गुप्ता का शव सूरजकुंड ओवर ब्रिज के पास रेलवे ट्रैक पर मिला था। पहले जब लाश मिली थी तब पहचान नही हो पाया था बाद में लोगों ने पहचान की। स्थानीय लोगों का कयास है कि परिवार को जहर देने के बाद रमेश ने आत्महत्या कर लिया होगा।
राजघाट और कोतवाली थाना की पुलिस के साथ सीओ कोतवाली और एसपी ट्रैफिक मौके पर पहुँच कर शव को पीएम के लिए भेज दिया । फिलहाल पुलिस इस मामले की तफ्तीश में जुटी हुई है। इन मौतों की जानकारी मिलने के बाद शहर में सनसनी है। रकाबगंज साहबगंज निवासी व्यापारी रमेश गुप्ता की महेवा ग़ल्ला मण्डी में तलहन दलहन की दुकान है।

मुख्यमंत्री  ने महापौर के पास फोन कर प्रकट की शोक संवेदना।

राजघाट थानाक्षेत्र के हसनगंज में व्यापारी रमेश गुप्ता,पत्नी व तीन बच्चों की मौत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरी संवेदना प्रकट की। महापौर सीताराम जायसवाल के पास फोन करके मुख्यमंत्री ने घटना की पूरी जानकारी ली और कहा कि रमेश गुप्ता व उनके पत्नी व बच्चों की मौत से मुझे गहरा दुःख है।

रचना ने मरने से पहले दिया बयान।

रचना ने मरने से पहले बयान  दिया कि पापा की मृत्यु ट्रेन से कटने से नही हुई है बल्कि जहर खाने से हुई है । पूरे परिवार ने जहर खाया था। चौकाने वाली बात यह है कि इस परिवार से भी बहुत से लोगों ने कर्ज लिया था। वह लोग कर्ज लौटा नहीं पा  रहे थे। बिजनेस के लिए रमेश गुप्ता को भी कई लोगों से  कर्ज लेना पड़ा। यानी यह परिवार कर्जदार तो था ही साथ ही इस परिवार से कर्जा लेने वालों ने कर्जा भी नहीं चुकाया था। बकौल रचना पूरे परिवार ने जहर खाया। रमेश को आशंका थी कि शायद जहर का उस पर उतना असर नहीं हुआ है। इसलिए वह रेल से कट कर जान देने के लिए निकल गये। पटरी पर पहुंचते पहुंचते रमेश ने दम तोड़ दिया।

व्यापारी की परिवार सहित आत्महत्या के जिम्मेदार कहीं सूदखोर तो नही ?

व्यापारी की आत्महत्या और पूरे परिवार द्वारा मौत को गले लगाने के बाद कहीं न कहीं यह सवाल उठ रहे हैं कि कर्ज़ में डूबे रमेश गुप्ता कहीं सूदखोरों के मकड़जाल में तो नहीं फंस गए थे। क्योंकि रमेश गुप्ता के पड़ोसी और उनके जानने वाले यह बात कह रहे हैं कि वह बकायेदारों की वसूली से परेशान थे। फिलहाल शहर में पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे बड़े पैमाने पर बिना लाइसेंस सूदखोरी का धंधा चल रहा है और जिम्मेदारों की चुप्पी से न जाने कितने और रमेश गुप्ता जैसे लोग मौत को गले लगाने को तैयार होंगे। यहां थाना स्तर पर अवैध सूदखोरों को तो छोड़िए, लाइसेंसी सूदखोरों का भी कोई रिकार्ड अभिसूचना विभाग के पास उपलब्ध नही है इसलिए सूदखोरों की दबंगई पर किसी तरह की कोई लगाम नही लग पा रही है। जबकि अधिकांश सूदखोर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं। हैरानी की बात यह है कि सूदखोरों का राजघाट थाने पर भी कोई रिकार्ड उपलब्ध नही है। यहां के थाना प्रभारी अनिल उपाध्याय का कहना है कि उन्हें लाइसेंसी सूदखोरों की कोई जानकारी नही है जबकि व्यापारिक इलाका होने के कारण सबसे ज़्यादा सूदखोरी के मामले राजघाट थाना क्षेत्र में ही सामने आते हैं।  बहरहाल अब यह जांच का विषय है कि व्यापारी रमेश गुप्ता और उसके परिवार की आत्महत्या में सूदखोर कितने जिम्मेदार हैं। मालुम हो कि इसके पहले भी कई लोगों ने सूदखोरों से तंग आकर आत्महत्या कर चुके है।

सिटी मजिस्ट्रेट ने परिजन को सौंपी ₹25000 की तात्कालिक सहायता राशि।

राजघाट थाना क्षेत्र में व्यापारी रमेश गुप्ता और उनके परिवार की आत्महत्या के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति के मद्देनज़र जिला प्रशासन की ओर से मृतक रमेश गुप्ता के पुत्र रजत गुप्ता को सिटी मजिस्ट्रेट अजीत कुमार सिंह द्वारा अंतिम संस्कार के लिए ₹25000 की तात्कालिक सहायता राशि प्रदान किया गया।

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