शौचालय का निर्माण करके ब्याज की बोझ से दब गए।

रिपोर्टर  धर्मपाल  पटेल
सहयोगी  संजित कुमार
    पी न्यूज वैशाली

सोनपुर -- स्वच्छ भारत अभियान के तहत गरीबो ने  कर्ज लेकर  शौचालय का निर्माण कराकर ब्याज की बोझ के नीचे  दवे जा रहे हैं ।  लेकिन  उन गरीबों को शौचालय निर्माण के बाद सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि ₹12000/= नही मिल  रहे हैं । प्रखंड क्षेत्र के कई पंचायत के वार्ड सदस्य ,वार्ड के नागरिकों ने इस बात का खुलासा किया है कि आज शौचालय बना 1 साल , 6 महीने हो गए हैं जिसकी फॉर्म भरकर प्रखंड कार्यालय में जमा कर दी गई ।  लेकिन आज तक प्रखंड कार्यालय की मनमानी के वजह से शौचालय की राशि नही मिल रही है ।  जनप्रतिनिधियों व  आलाधिकारियों एवं  प्रखंड कार्यालय चक्कर लगाते-- लगाते थक गया हूं लेकिन कई महीने बीत चुके लेकिन शौचालय निर्माण के मिलने वाली प्रोत्शाहन राशि खाता में नहीं आई है उधर महाजन का व्यास प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है बता दे कि यह मामला किसी एक पंचायत की नहीं बल्कि  पूरे पंचायत  क्षेत्र में है । इस तरह की मामले की उजागर वार्ड सदस्यों के साथ लाभार्थियों ने भी  इस बात की उजागर कर रहे हैं ।  कहीं न कहीं  अधिकारी  अपने कार्यो में लापरवाही का
उदाहरण प्रस्तुत तो नहीं कर रहे  । इसके पीछे कुछ न कुछ रहस्य बनी हुई  है । कई शौचालय निर्माण के राशि पाने वाले लोगों ने दवे जवान से नाम ना छापने के आधार पर उजागर किया है कि मेरे पैसे को बन्दरवाट करने के लिए  जनप्रतिनिधि व अधिकारी की मिली भगत के कारण पैसे मिलने में देरी हो रही है ।  जिसे नहीं देने के कारण मिलने वाली शौचालय की राशि लाभुकों  को नहीं मिल रही है । सरकार द्वारा मिलने वाली कोई भी जनकल्याणकारी योजनाओं की राशि पूर्ण रूप से आम जनता को  मिले ऐसा असंभव हो गया है । यह जांच की विषय है चाहे वह शौचालय की राशि हो , प्रधानमंत्री आवास की राशि हो, किसान की खेती से संबंधित अनुदान की राशि हो, किसी भी सरकारी योजना की राशि हो उसमे कहीं न कही  बंदरवाट, कमिशन की मांग होती है । वैसे लोग जो कमीशन या घुस नहीं देते हैं वैसे लोगों को कार्यालय के चक्कर जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर चक्कर लगाते -लगाते थक जाते हैं और उन्हें सरकार द्वारा मिलने वाली राशि हो या कोई भी सामान पूर्ण नही मिल पाती है ।  गरीब असहाय व्यक्ति थक जा रहे हैं लेकिन उनका वाजिव हक उन्हें नही मिल पाती है वैसे लोगो को मिलती है जो परिपूर्ण , दवंग , या पहुँच वाले लोग हैं उन्हें सरकारी सहायता लेने में कठिनाई नहीं होती है , होती हैं  तो गरीब, असहाय, मजदूर ,छोटे -छोटे किसान , बधुआ मजदूर के साथ कमजोर लोगो को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है । आज 50% गरीबो को पूर्ण हक नहीं मिलती है  । बिहार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गई है इसमें कोई अछूत नहीं है छोटे चपरासी  से लेकर अधिकारी तक भी इसमें कहीं न कहीं संलिप्त है ।  सारी हक़ीक़ते  जांच पड़ताल के बाद ही  उजागर होती  है । ऐसे में गरीब असहाय को मदद के बजाए  शोषण  की जाती है । उसे पूर्ण  सहायता सरकार द्वारा मिलने वाली राशि नहीं मिल पाती है । सरकार लाख दावे करती है लेकिन उनकी सारे दावे को सच्चाई जमीनी स्तर पर जाँच पड़ताल करने पर पोल खुल जाती है । अब कई तरह के सवाल खड़े होते हैं कि--  कैसे मिलेंगे गरीबो, असहायों को उन्हें पूर्ण हक । कौन दिलायेगें उनको पूर्ण हक ।

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