किसान के बेटे ने किया सुल्तानपुर का नाम रोशन आई ए एस परीक्षा में हासिल की 41 वी रैंक


आई ए एस परीक्षा में चयन होने पर विकास खण्ड बल्दीराय के हैहना कला के चकटेरी गांव निवासी आलोक कुमार दूबे ने एक मुलाकात के दौरान कहा।उन्होंने मीडिया के माध्यम से युवा पीढ़ी को सन्देश भी दिया कि गंतब्य तक पहुचने में देर भले हो परन्तु मेहनत निश्चित ही गंतब्य तक पहुँचाती है।22 अप्रैल 1990 को बल्दीराय मुख्यालय से चकटेरी गांव में जन्मे आलोक शुरू से ही मेधावी थे।उनकी प्रारम्भिक शिक्षा बल्दीराय स्थित श्रीमती बिद्या देवी स्कूल में हुई तो 6 से 12 तक गौरीगंज स्थित नवोदय विद्यालय में रहकर पढ़ाई की।इंटरमीडिएट के बाद मोदीनगर गाजियाबाद स्थित डाक्टर के एन मोदी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से बी टेक कर नोयडा में साल 2012 से पांच लाख सालाना के पैकेज पर नॉकरी शुरु की तो 20176 में उनका पैकेज 12 लाख सालाना हो गया।परन्तु उनके दिमाग मे आई ए एस बनने की तमन्ना घर कर गयी थी।उन्होंने 2012 में यह सर्विस छोड़ दी और दिल्ली में ही रहकर तैयारी शुरु कर दी।कठिन परिश्रम से तैयारी के उपरांत जब सिबिल सेवा परीक्षा का परिणाम आया तो 41 वी रैंक मिली ।चयन की खबर मिलते ही घर पर शुभचिंतको का तांता लग गया ।लोग बधाई देने के लिये घर पहुँचने लगे।
इनसेट
बल्दीराय।यू तो आलोक ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा उत्तीर्ण कर बल्दीराय ही नही जनपद के नाम रोशन कर दिया।सामान्य से परिवार में पैदा होकर इस मुकाम पहुँचना निश्चित ही बड़ी बात है।पारिवारिक स्थित पर गौर करे तो इनके पिता ओम नारायण दूबे घर पर ही रहकर खेती किसानी करते है।शुरू से ही पिता ओम नारायण ने तीन बच्चों में सबसे बड़ी बेटी अर्चना को परस्नातक तक की शिक्षा दिलवाई तो बड़े बेटे आलोक व छोटे बेटे अनुराग को इंजीनियरिंग तक की पढ़ाई पूरी करवाई।छोटा बेटा अनुराग एटा जनपद में जूनियर इंजीनियर पद पर तैनात है।जब 12 लाख के पैकेज की सर्विस छोड़ आलोक ने तैयारी की इच्छा जताई तो माता पिता भाई बहन जरा भी विचलित नही हुए।कठिन परिश्रम के बाद जब मुकाम हासिल हुआ तो परिवार ही नही तहसील व जनपद खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिये आलोक ने माता पिता के साथ ही भाई अनुराग व बहन अर्चना को श्रेय दिया है।  

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