दो दिवसीय उर्स का समापन

अल्लाह जानता है, मोहम्मद का मर्तबा*

सुल्तानपुर।तहसील क्षेत्र बल्दीराय के नंदौली गांव मे चल रहे दो दिवसीय उर्स बृहस्पतिवार को समापन हो गया।उर्स में दूर-दराज के हजारों जायरीनों व पूर्व ब्लाक प्रमुख यशभद्र सिंह"मोनू" ने बाबा नूर शहीद की मजार पर चादर पेश कर सिन्नी (प्रसाद) चढ़ाई।और अपनी व देश की सलामती की दुआएं मांगी।उर्स के पहले दिन मजार पर सुबह कुरआन खानी,गुस्ल व रात्रि में जश्ने ईदमिलादुन्नबी (जलसे)का प्रोगाम किया गया।जलसे की शुरुआत मौलाना अकबर अली इलाहाबादी ने तिलावते कुरआन पाक से की।उन्होंने अपनी तक़रीर में कहा कि इस्लाम धर्म आपसी भाई चारे के साथ शन्ति एकता का पैगाम देता है,और हम जिस मुल्क में रह रहे है उससे मोहब्बत व उसकी हिफाजत करना हम सब की जिम्मेदारी है।जलसे में कई शायरों ने अपनी-अपनी नातिया कलाम पढ़ी।उर्स के दूसरे दिन रात्रि में कव्वाली का प्रोग्राम किया गया,जिसमे नागपुर (महाराष्ट) के मशहूर कौव्वाल हबीब अजमेरी एंड पार्टी ने अपनी कौव्वाली पेश की----अल्लाह को देखा है किसी ने तो बताये,जिसको भी नजर आये मोहम्मद।।
अल्लाह तो एक को मिलना था वह मिल गया,अब जिसको मिलेंगे तो मोहम्मद ही मिलेंगे।।
वही दूसरे कव्वाल सईद फरीद निजामी एंड पार्टी बेंगलुरु ने भी अपनी अंदाज में कौव्वाली पेश की-----:मैंने जब से पी लिया,एक बारे जामें मुस्तफ़ा।सब बुलाते है मुझे कहके गुलामें मुस्तफा।।
सुनकर उर्स में आये सभी जायरीन खुशी से झूम उठे।उर्स में लगातार दो दिन लँगरे-आम व मेले का आयोजन भी किया गया था।उर्स का आयोजन प्रधान मोहम्मद मुस्लिम खान उर्फ पप्पू व संचालन मौलाना सबदर रजा ने किया।इस मौके पर पूर्व ब्लाक प्रमुख/सदस्य जिला पंचायत यशभद्र सिंह"मोनू" मासूम खान,डाक्टर नफीस अहमद,मोहम्मद असलम,बाबा कदीर,मुन्नू सेठ,राजधर शुक्ल, बब्बू बीडीसी, ग़ुलाम मोहम्मद,जुग्गू, आबाद हकीम,राजेश कुमार राय,कुन्नु, पंकज श्रीवास्तव, सलमान, सुल्तान, मोनू,मोहम्मद रफी सहित हजारों जायरीन मौजूद रहे।

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