चैती छठ पर बना ग्रह-गोचरों का दुर्लभ संयोग, सौभाग्य योग में खरना आज

  रवियोग में सायंकालीन अर्घ्य कल, उदीयमान सूर्य को अर्घ्य (पारण) सर्वार्थ सिद्धि योग में 12 को

कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित राकेश झा शास्त्री ने बताया कि चैती छठ पर ग्रह-गोचरों का दुर्लभ संयोग बन रहा है I जिसमें आदित्य योग, गजकेसरी योग, लक्ष्मी-नारायण योग, रवियोग, सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है I कल सर्वार्थ सिद्धि योग में व्रती नहाय-खाय कर चार दिवसीय व्रत का संकल्प ली I आज सौभाग्य योग में पुरे दिन निर्जला उपवास के बाद व्रती संध्या में सूर्य की आराधना कर दूध, गुड़, अरवा चावल से बने प्रसाद को ग्रहण कर 36 घंटे का उपवास आरंभ करेगी I भगवान भास्कर को कल रवियोग में सायंकालीन अर्घ्य और शुक्रवार को सर्वार्थ सिद्धि योग में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती संकल्पित अनुष्ठान संपन्न कर पारण करेंगी।

खरना से सप्तमी तक बरसती है षष्ठी मैया की कृपा

पंडित झा ने बताया कि छठ महापर्व शरीर, मन तथा आत्मा की शुद्धि का पर्व है I वैदिक मान्यताओं के अनुसार नहाय-खाय से छठ के पारण सप्तमी तिथि तक उन भक्तों पर षष्ठी माता की कृपा बरसती है जो श्रद्धापूर्वक व्रत-उपासना करते है I प्रत्यक्ष देवता सूर्य को पीतल या तांबे के पात्र से अर्घ्य देने से आरोग्यता का वरदान मिलता है I पंडित झा ने कहा सूर्य को आरोग्य का देवता माना गया है I सूर्य की किरणों में कई रोगों को नष्ट करने की क्षमता है I

खरना के प्रसाद से दूर होते कष्ट

ज्योतिषी पं० राकेश झा शास्त्री के अनुसार छठ महापर्व के चतुर्थ दिवसीय अनुष्ठान के अंतर्गत दूसरे दिन खरना के प्रसाद में ईख के कच्चे रस, गुड़ के सेवन से त्वचा रोग, आँख की पीड़ा , शरीर के दाग-धब्बे समाप्त हो जाते है I

सूर्यदेव को अर्घ्य्र देने से मिलेगी शांति व उन्नति

ज्योतिषी झा के अनुसार डूबता हुए सूर्य को अर्घ्य देने मानसिक शांति और जीवन में उन्नति का वरदान मिलता है I साथ ही जल में रक्त चंदन, फूल के साथ अर्घ्य देने से यश की प्राप्ति होती है I प्रातः कालीन अर्घ्य में लाल चंदन, लाल फूल, इत्र के साथ ताम्रपत्र में अर्घ्य देने से आयु, विद्या, कीर्ति, यश और बल में वृद्धि होती है I भगवान भास्कर को दूध का अर्घ्य देने से महालक्ष्मी की प्राप्ति तथा जल या दूध में गुड़ मिलाकर अर्घ्य देने से पुत्र और सौभाग्य की प्राप्ति होती है I

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