सनोफी ने साल 2015 से ही डेग्वाक्सिया को अमेरिका के बाहर के देशों में उतार दिया था. लेकिन साल 2017 में फिलीपींस में स्कूली बच्चों को बांट दिया गया था. लेकिन वहां कई बच्चों पर इसका उलटा प्रभाव पड़ा. इसके बाद सनोफी का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था.खुद कंपनी को इस बात की घोषणा करनी पड़ी थी कि जिन लोगों को कभी डेंगू नहीं हुआ है, अगर उन्हें टीका लगा दिया जाता है तो उन्हें डेंगू होने की संभवना बढ़ जाती है.

9 से 16 साल के किशारों को ही लगाई जा सकता है ये टीका
अब जब एफडीए ने दोबारा इसे मान्यता दी है तो इस शर्त के साथ कि फिलहाल यह टीका केवल 9 से 16 साल के किशोर व किशोरियों को ही लगाया जाएगा. साथ ही ये टेस्ट पहले ही कर लिया जाएगा और पुख्ता हो लिया जाएगा कि किशोर अथवा किशोरी को पहले ही डेंगू हो चुका है.

दुनिया के एक तिहाई हिस्से में घूम रहे हैं डेंगू के वायरस
केंद्रीय रोग नियंण के एक आंकड़े के अनुसार दुनिया के एक-तिहाई हिस्से में डेंगू होने का खतरा लगातार बना रहता है. इसके वायरस हर जगह मौजूद रहते हैं. आमतौर पर इसके वायरस मच्छर से फैलते हैं.

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ऐसा बताया जा रहा है कि दुनिया में 40 करोड़ से ज्यादा लोग डेंगू की गिरफ्त में आ चुके हैं. जबकि पांच लाख से ज्यादा लोग डेंगू हाईमोरहैजिक फीवर का शिकार हो चुके हैं. जबकि सीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार 20 हजार लोगों की अब तक डेंगू से मौत हो चुकी है.

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