पश्चिम बंगाल में गुटखा और पान मसाला पर प्रतिबंध


कोलकाता 3 नवंबर। गुटखा और पान मसाला चबाने वालों के लिए एक बुरी खबर है कि अब सरकार ने ऐसे सभी उत्पादों पर एक साल के लिए पद्रेशभर में प्रतिबंध लगा दिया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। जोकि 7 नवंबर 2019 से एक साल के लिए प्रभावी रहेगी।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने 25 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की है। सरकार ने 7 नवंबर 2019 से एक साल के लिए गुटखा और पान मसाला वाले तंबाकू या निकोटीन पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस अधिसूचना के अनुसार तंबाकू व निकोटिन वाले गुटखा और पान मसाले के निर्माण, भंडारण, वितरण या बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन पदार्थेंा पर अधिसूचना के अनुसार 7 नवंबर 2019 से एक साल के लिए प्रतिबंध लगा रहेगा।  इस दौरान तंबाकू  व निकोटिन वाले गुटखा और पान मसाले के निर्माण, भंडारण, वितरण या बिक्री पर रोक रहेगी।
उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरे को देखते हुए इस वर्ष गांधी जयंती पर राजस्थान में तंबाकू, निकोटीन, मैग्नीशियम कार्बोनेट और खनिज तेल वाले पान मसाले पर प्रतिबंध लगा दिया गया है । इसी तरह नेशनल टोबैको टेस्टिंग लेबोरेटरी की रिपोर्ट के बाद बिहार ने पान मसाला के 15 ब्रांडों के निर्माण, भंडारण, ढुलाई और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसी तरह से उत्तराखंड सरकार ने भी पिछले महीने तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाले पर प्रतिबंध लगा दिया है।
नारायण सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, हावड़ा के कैंसर सर्जन डॉ. सौरव दत्ता ने कहा, सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम बहुत ही अच्छा है लेकिन केवल अधिसूचना पर्याप्त नहीं है, हमे इसे सख्ती से लागू करना होगा, ताकि हमारी युवा पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो सके।
उन्होने बताया कि ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2 की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में 20.1प्रतिशत लोग बिना धुआं वाले तंबाकू का उपयोग करते हैं। इनमें 22.8 प्रतिशत पुरुष और 17.2 प्रतिशत महिलाएँ शामिल हैं।

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