"कम आयु में ही विज्ञान के संग-संग 'साहित्य' और 'संगीत' का अनोखा दृष्टांत"



>>>कहते हैं न कि "कैसे आकाश में सुराख़ नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों" इसी को हकीक़त में बदलते हुए विज्ञान के संग-संग साहित्य और संगीत का अद्भुत उदाहरण पेश किया है बिहार के एक छोटे-से कस्बे में पले-बढ़े मेडिकल स्टूडेंट संदीप सेन ने। आकाश मिश्रा और अमृता कौर द्वारा संग्रहित एन्थोलॉजी "अब सुनो" जिसमें पूरे देशभर के विभिन्न राज्यों के टॉप तीस कवियों की रचनाओं का चयन हुआ है, उसमें संदीप सेन(एस हिन्दुस्तानी) की भी दो रचनाओं का प्रकाशन स्वयं में एक गर्व का विषय है ।
ज्ञात हो कि संदीप सेन एक मेडिको,शायर,हिन्दी-उर्दू ग़ज़लकार,कवि,गीतकार और परफॉर्मर हैं। ऑल इंडिया रेडियो के साथ-साथ देशभर के विभिन्न मंचों पर परफॉर्म कर चुके संदीप सेन विभिन्न विषयों पर सौ से अधिक गीत,ग़ज़ल और कविताएं रच चुके हैं। अमर उजाला के काव्य कॉलम के अंतर्गत नियमित उनकी रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।
मीडिया टीम से बातचीत के दौरान साइंस और लिटरेचर में संबंध बताते हुए उन्होंने कहा है "साइंस इज एन एक्सप्लेन्ड लिटरेचर एंड लिटरेचर एन अनएक्सप्लेंड साइंस" साथ ही उन्होंने अपने लेखन के शुरूआती दौर की चर्चा करते हुए अपने पी सी  हाई स्कूल पटसा के अंग्रेजी शिक्षक हीरा प्रसाद सिंह से प्रेरणा की बात कही। संदीप की इस कामयाबी पर उनके प्रशंसकों और गांव वालों ने गर्व व्यक्त करते हुए उनकी बहुमुखी प्रतिभा की तारीफ़ की,बधाई संदेश भेजे और उज्जवल भविष्य हेतु शुभकामनाएं दी।

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