खण्डवा।जिस तरह बिंदी महिलाओं के माथे का श्रृंगार है उसी तरह हिंदी भारत माता के माथे का श्रृंगार है।
सद्भावना मंच अध्यक्ष प्रमोद जैन ने ये उद्गार व्यक्त किये।उनकी अध्यक्षता में हिंदी दिवस पर आयोजित विशेष आयोजन किया गया।
विश्व हिंदी दिवस पर मंच कार्यालय में सम्पन्न  कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार गोविंद शर्मा ने कहा कि विदेशों में भी हिंदी प्रेमी साहित्यकार देश का परचम फहरा रहे हैं।
सद्भावना मंच सदस्य कमल नागपाल ने बताया कि इस अवसर पर उपस्थित देवेंद्र जैन,डॉ जगदीशचन्द्र चौरे,अतुल सिंह रावत,गणेश भावसार,त्रिलोक चौधरी,डॉ एम एम कुरैशी,एन के दवे,नारायण फरकले,कविता विश्वकर्मा,महेश मूलचंदानी,चंद्रशेखर सोनी,सुनील पासी,मुरली कोडवानी,कमल नागपाल,चन्द्र कुमार सांड,वैभव कोठारी और महेंद्र ताड़गे,आदि ने हिंदी का महत्व बताया और हिंदी को देश के विकास में अत्यंत आवश्यक बताया।देश की अनेक भाषाओं के साहित्य को हिंदी में अनुवादित कर सम्मान दिया जा रहा है।
संचालन मंगला चौरे ने किया और  आभार चंद्र कुमार सांड ने व्यक्त किया।

चंद्रशेखर महाजन
ब्यूरोहेड मध्यप्रदेश

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